कहाँ से आई हिन्दू धर्म|सनातन धर्म

कहाँ से आई हिन्दू धर्म|सनातन धर्म आज मै आपको एक प्राचीन धर्म के बारे में बताने जा रही हूँ जो प्राचीन धर्मो में से एक है| इसे विश्व का सबसे प्राचीनतम धर्म कहा जाता है|

इसे ‘वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म’ भी कहा जाता है जिसका अर्थ है- हिन्दू धर्म की उत्पत्ती मानव की उत्पत्ती से भी पहले हुई थी|

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हिन्दू धर्म एक ऐसा धर्म है जिसके अनुयायी अधिकांश रूप में भारत, नेपाल और मॉरिशस में बहुत संख्या में है| हिन्दू धर्म के इतिहास के बारे में हम आगे विस्तृत रूप से व्याख्या करते है-

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इतिहास-

हिन्दू या सनातन धर्म के इतिहास के बारे में अनेक विद्वानों में अनेक मतभेद है|हिन्दू धर्म सनातन धर्म है क्योकि यह विश्व के अन्य धर्मो से अलग है| सभी धर्मो का कोई न कोई संस्थापक रहा है और

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उसके विकास और उढ़्भव के पीछे कोई कारण रहा है और एक काल निश्चित रहा है| उनके अनुनायियों मे अनेक भ्रांतिया उठी जिनके निवारण के बाद ही प्रचार के माध्यम से उनको लोगो के बीच पहुचाया गया| उनका उदेश्य एक क्षेत्र विशेष के लोगो के लिए ही उपयोगी रहा है ,

परंतु सनातन धर्म वह धर्म है जिसमे अनेक धर्मनिहित है, जहा धर्मो की क्रियाए स्वभावसृष्ट होती है वही सनातन धर्म जगत के सनातन स्वभाव पर आश्रित है| इसका न कोई संस्थापक रहा और न किसी विशेष काल मे इसका उद्भव हुआ है, न इसकी परंपरा विभाजित हुई है

और न यह किसी क्षेत्र वर्ग या जाति से संबन्धित है| न इसके प्रचार का कोई द्रविड़ प्रयास हुआ| यह अनादि काल से अविच्छिन्न परंपरा मे , सनातन भगवान को केन्द्रित कर उसके सनातन जीवो के उद्धार के लिए, चला आ रहा है|

इसी से स्वामी करपात्री जी ने कहा है कि

‘सनातन काल से, सनातन भगवान के, सनातन जीवो के उद्धार के लिए सनातन धर्म है|’ यह न कही से आया है न कही पैदा हुआ, न किसी ने इसे चलाया यह हमारे रक्त, क्रिया व्यापार, जीवन और सांस मे बसा है

सनातन धर्म का अर्थ-

‘सनातन’ का अर्थ है – शाश्वत या ‘हमेशा बना रहने वाला’, अर्थात् जिसका न आदि है न अन्त।

‘धर्म’ का कोई पर्यायवाची शब्द किसी भी साहित्य मे नही दिया गया है| अंग्रेजी का रिलीजन शब्द ‘धर्म’ की सीमा को भी नही छूता है| यह संप्रदायवाद को सूचित करता है, पर सनातन मूल है|

यह संप्रदाओ के पहले का है| संमप्रदाओ के स्थायी मूल्यो , आदर्शो आदि का संप्रदाओ का कुछ लेना देना नही है| कई सम्प्रदाओ का स्वरूप बदलता रहा है परंतु सनातन धर्म का स्वरूप परंपरागत है| इसके मूल्य ओर आदर्श शाश्वत है| इसलिए ‘धर्म’ और ‘रिलीजन’ मे कोसो को दूरी है|

डॉ ऐनिबेसेंट ने सेंट्रल हिन्दू कॉलेज,वाराणसी मे कहा था –

भूल मत करो बिना हिन्दुत्व के भारत का कोई भविष्य नही है हिन्दुत्व वह भूमि है जिसमे भारत की जड़े गडी है इससे इनको निकाल देने पर यह स्थानातरित वृक्ष की तरह सुख जाएगा इसी प्रकार यदि यहा से हिन्दुत्व हटा लिया जाए तो अतीत का भारत मात्र एक भौगोलिक इकाई बनकर रह जाएगा

गीता मे सनातन भगवान ने कहा है कि जब जब धर्म की हानि होती है तो मै अवतार लेता हूँ – तदात्मांन सृजाम्यहम|

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कहाँ से आई हिन्दू धर्म|सनातन धर्म मे आपने इस छोटी सी आर्टिक्ल मे कुछ महत्व पूर्ण बाते जानी है ओर भी ऐसे आर्टिक्ल को हमारे पेज पर पढ़ सकते है

Deepshikha Gupta

Deepshikha Gupta likes to work as a blogger, she is more conscious in writing articles, she is a resident of Varanasi, she has more thinking power and is passionate about thought....

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