जानिए भारत की कौन-कौन सी संस्कृति है- परिचय

भारत का सांस्कृतिक परिचय –

नमस्ते , आज इस artical जानिए भारत की कौन-कौन सी संस्कृति है- परिचय मे आपको भारत देश के संस्कृति और यहाँ की विशेषताओ के बारे मे जानकारी देगे

भारत की संस्कृति विश्व की सर्वाधिक प्राचीन व समृद्ध संस्कृति है|

हिमालय पर्वत के दक्षिण तथा हिन्द महासागर के उत्तर मे स्थित विशाल प्रायद्वीप को भारत कहा जाता है|

यूनानियों ने इस देश को इंडिया कहा तथा मध्यकालीन लेखको ने हिन्द अथवा हिंदुस्तान के नाम से संबोधित किया है| भारत वर्ष को जम्बूद्वीप, भारतवर्ष, आर्यावर्त, हिंदुस्तान तथा हिन्द आदि नामो से जाना जाता है|

भारत की भौगोलिक स्थिति –

प्रकृति ने भारत को एक विशिष्ट भौगोलिक इकाई प्रदान की है| उत्तर मे हिमालय पर्वत, एक ऊंची दीवार के समान इसकी रक्षा करता है तथा हिन्द महासागर इस देश के पूर्व , पश्चिम , तथा दक्षिण से घिरे हुए है|

इन प्राकृतिक सीमाओ द्वारा बाह्य आक्रमण से अधिकांश सुरक्षित रहने के कारण भारत देश अपनी एक सर्वथा स्वतंत्र तथा पृथक सभ्यता का निर्माण कर सका है| विभिन्न भौगोलिक क्षेत्र के कारण यहाँ प्राकृतिक एवं सामाजिक स्तर की विभिन्नताए दृष्टिगोचर होती है|

भारत का प्रत्येक भोगोलिक क्षेत्र एक विशिष्ट इकाई है जिसमे भिन्न भिन्न जाति , धर्म , भाषा तथा वेश – भूषा और आचार – विचार के लोग निवास करते है|

कई वाह्य विभिन्नताओ के बीच भारत मे सदियो से आंतरिक एकता बनी हुई है| फलस्वरूप अनेकता मे एकता भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषता बन गई है| देश की विशिष्ट प्राकृतिक सीमाओ ने यहाँ के निवासियों के मानस मे मातृभूमि के प्रति स्नेह , सम्मान , श्रद्धा और समपर्ण की भावना जागृत की है|

मौलिक एकता का विचार यहाँ सदेव बना रहा तथा उसने सदियो तक अपनी विशिष्टता बनाए रखी है| प्राचीन कवियों , लेखको तथा विचारको के मानस मे एकता की यह भावना सदियो पूर्व से ही विद्दमान रही है| कौटिल्य ने अर्थशास्त्र मे कहा है कि –

हिमालय से लेकर समुद्र तक हज़ार योजन विस्तार वाला भाग चक्रवर्ती राजा का शासन क्षेत्र होता है|भारतीयो की प्राचीन धार्मिक भावनाओ एवं विश्वासों से भी इस सारभूत एकता का परिचय मिलता है|

भारत की पवित्र नदियां –

भारत मे यहाँ की सात पवित्र नदियों गंगा , यमुना , गोदावरी , सरस्वती , नर्मदा , सिंधु , कावेरी तथा मोक्षदायिनी नगरियो – अयोध्या , मथुरा , माया ,काशी , कांची , अंवन्तीपूरी , तथा द्वारिका पूरी देश के विभिन्न भागो मे बसी हुई होने पर भी देश के सभी निवासियों के लिए समान रूप से श्रद्धेय है|

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गंगा

वेद – पुराण , उपनिषद , रामायण , महाभारत आदि ग्रंथो का सर्वत्र सम्मान है तथा शिव और विष्णु आदि देवता सर्वत्र पूजे जाते है|

भारत की भाषाएँ –

यहाँ अनेक भाषाएँ है तथापि वे सभी संस्कृत से ही उद्द्भुत तथा प्रभावित है| धर्मशास्त्रों द्वारा प्रतिपादित सामाजिक व्यवस्था भी सर्वत्र एक ही समान है| वर्णाश्रम , पुरुषार्थ तथा सोलह संस्कार आदि सभी समान रूप से सबके आदर्श रहे है|

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हिन्दी भाषा

प्राचीन काल मे , जबकि आवागमन के साधनो का अभाव था , पर्यटक , धर्मोपदेशक , तीर्थयात्री , विद्यार्थी इस एकता को स्थापित करने मे सहयोग प्रदान करते रहे है| राजसूय और अश्वमेघ जैसे यज्ञों के अनुषठान द्वारा चक्रवर्ती पद के आकांशी सम्राटों ने सदेव इस भावना को व्यक्त किया है कि भारत का विशाल भूखंड ‘एक’ है|

भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ –

भारतीय संस्कृति प्राचीन काल से ही ”वसुधैव कुटुंबकम” और “असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योर्तिगर्मय” की मूल अवधारणा पर आधारित है| अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यो के आधार पर भारतीय संस्कृति आज भी “सबका साथ सबका साथ विकास” जैसे आदर्शो को आगे बढ़ा रही है|

भारत मे कुल 28 राज्य 9 केंद्र शासित प्रदेश है| भारत की राजधानी नई दिल्ली है| भारत के संविधान ने हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप मे स्वीकार किया है| भारत की संस्कृति कई चीजों को सम्मिलित कर बनी है जिसमे भारत का गौरवशाली इतिहास , विलक्षण भूगोल तथा सिंधु घाटी की सभ्यता के दौरान बनी और आगे चलकर वैदिक युग मे विकसित हुई भारतीय सभ्यता की प्राचीन विरासते शामिल है|

भारत कई धर्म – प्रणालियों जैसे हिन्दू धर्म , जैन धर्म , बौद्ध धर्म और सिख धर्म जैसे धर्मो का जनक स्थल है|

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भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषताओ मे – प्राचीनता , निरन्तरता , लचिलापन , सहिष्णुता , ग्रहनशीलता , आध्यामिकता एवं भौतिकता का संन्यवय तथा अनेकता मे एकता आदि है| भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह कि हजारो वर्षो के बाद भी यह संस्कृति आज भी अपने मूल स्वरूप मे जीवित है|

भारत मे नदियो , वट – पीपल जैसे वृक्षो , सूर्य तथा अन्य प्राकृतीक देवी देवताओ कि पुजा अर्चना का कर्म शताब्दियों से चला आ रहा है| देवताओ की मान्यता , हवन और पुजा – पाठ की पद्धतियो की निरंतता भी आज तक अप्रभावित रही है|

वेदो और वैदिक धर्म मे करोड़ो भारतीयो की आस्था और विश्वास आज भी उतना ही है जितना हजारो वर्ष पूर्व था| गीता और उपनिषदों के सदेश हजारो सालो से हमारी प्रेरणा और कर्म का आधार रहे है|

भारतीय संस्कृति के इस लचीले स्वरूप मे जब भी जड़ता की स्थिति निर्मित हुई तब किसी महापुरुष ने इसे गतिशीलता प्रदान कर इसकी साहिष्णुता को नई आभा से मंडित कर दिया| इस दृष्टि से प्राचीन काल मे बुद्ध और महावीर के द्वारा तथा मध्य प्रदेश मे शंकराचार्य , कबीर , गुरुनानक और चैतन्य महाप्रभु के द्वारा एवं आधुनिक काल मे महात्मा ज्योतिबा फुले , पं० दीनदयाल उपाध्याय के द्वारा किए गए प्रयास इस संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर बन गए|

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संस्कृति

भारतीय संस्कृति मे आश्रम व्यवस्था के साथ धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों का विशिष्ट स्थान रहा है| इन पुरुषर्थों ने ही भारतीय संस्कृति मे भौतिकता और आध्यामिकता का एक अद्भुत समन्वय स्थापित कर दिया| हमारी संस्कृति मे जीवन के लौकिक और परलौकिक दोनों पहलुओ को धर्म से संबंध किया गया है|

उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक सम्पूर्ण भारत मे समान रूप से जन्म , विवाह और मृत्यु आदि से संबधित विभिन्न संस्कार प्रचलित है| विभिन्न रीति- रिवाज, आचार – विचार और तीज- त्योहार मे भी समानता है|

संगीत के सात स्वर और नृत्य सम्पूर्ण भारत मे समान रूप से प्रचलित है| भारत अनेक धर्मो संप्रदाओ , मतो , और पृथक आस्थाओ एवं विश्वासों का देश है| कई सारे एतीहासिक युग आए आर गए लेकिन कोई भी इतना प्रभावशाली नही हुआ की वो हमारी वास्तविक संस्कृति को बदल सके| संस्कारो की नाभिरज्जु के द्वारा पुरानी पीढी की संस्कृति हमेशा नई पीढी को अच्छा व्यवहार करना , बड़ो की इज्जत करना ,मजबूर और गरीब तथा जरूरत मंद लोगो की मदद कर्ण सिखाती है|

हमारी धार्मिक संस्कृति है कि हम व्रत रखे , पुजा करे , गंगा जल अर्पण करे , सूर्य – नमस्कार करे | परिवार के बड़ो सदस्यो का चरण स्पर्श , प्रतिदिन ध्यान और योग करे ,तथा भूखे और अक्षम लोगो को अन्न – जल दें|यह हमारे राष्ट्र कि महान संस्कृति है कि हम बहुत खुशी के साथ अपने घर आए मेहमानो कि सेवा करते है क्योकि मेहमान , भगवान का रूप होता है|

भारत मे “अतिथि देवो भव” का कथन बेहद प्रसिद्ध है| हमारी संस्कृति कि मूल उद्देश्य आध्यात्मिक उन्नति तथा मानवता कि स्थापना है|

Deepshikha Gupta

Deepshikha Gupta likes to work as a blogger, she is more conscious in writing articles, she is a resident of Varanasi, she has more thinking power and is passionate about thought....

One thought on “जानिए भारत की कौन-कौन सी संस्कृति है- परिचय

  • April 2, 2020 at 6:47 AM
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    Good describe 😊

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